Moti Dungri Ganesh Ji Mehndi Prasad, इसमें बताया गया है कि अगर आपकी शादी नहीं हो रही तो 13 सितंबर को मोती डूंगरी गणेश जी की मेहंदी का प्रसाद जरूर लें।
अगर आपकी शादी में बार-बार रुकावट आ रही है या विवाह का रिश्ता तय नहीं हो पा रहा है, तो जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर से जुड़ी यह खास धार्मिक परंपरा आपके लिए जानने लायक है।
गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मोती डूंगरी गणेश जी के मंदिर में मेहंदी पूजन और सिंजारा उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर मेहंदी भगवान गणेश जी को अर्पित की जाती है और उनका विशेष श्रृंगार किया जाता है। पूजा के बाद यही मेहंदी भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है।
इस मेहंदी को लेकर विवाह से जुड़ी एक खास धार्मिक मान्यता भी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन युवक-युवतियों के विवाह में बार-बार रुकावट आ रही है या जिनका विवाह तय नहीं हो पा रहा है, वे अगर गणेश जी को अर्पित की गई मेहंदी का प्रसाद अपने हाथों में लगाते हैं, तो गणपति महाराज की कृपा से उनकी विवाह संबंधी मनोकामना पूरी हो सकती है।
इसी मान्यता के चलते सिंजारा के दिन बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवतियाँ और उनके परिवार मोती डूंगरी गणेश मंदिर पहुँचते हैं और मेहंदी का प्रसाद लेते हैं।
यह परंपरा मुख्य रूप से आस्था और श्रद्धा से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे किसी निश्चित परिणाम के दावे के रूप में नहीं, बल्कि भगवान गणेश के प्रति विश्वास और मनोकामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में देखना चाहिए।
इस दिन गणेश जी का विशेष पूजन और श्रृंगार किया जाता है। उन्हें मुकुट और विशेष आभूषणों से सजाया जाता है। इसके अगले दिन गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
अगर आप भी भगवान गणेश में आस्था रखते हैं, तो सिंजारा के अवसर पर मोती डूंगरी गणेश जी के दर्शन करना और मेहंदी प्रसाद ग्रहण करना आपके लिए एक विशेष धार्मिक अनुभव हो सकता है।
