Khole Ke Hanuman Ji Mandir Jaipur, इसमें पहाड़ों के बीच बसे जयपुर के खोले के हनुमान जी मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है।
जयपुर में घूमने के लिए बहुत सी जगहें हैं। यहाँ किले हैं, महल हैं, मंदिर हैं और खूबसूरत पहाड़ियाँ भी हैं। लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं, जहाँ पहुँचने के बाद लगता है कि यहाँ सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि कुछ खास देखने आए हैं। खोले के हनुमान जी मंदिर भी ऐसी ही एक जगह है।
जयपुर की लक्ष्मण डूंगरी की पहाड़ियों के बीच बना यह मंदिर भगवान हनुमान के भक्तों के लिए बहुत खास है। यहाँ हर दिन बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं। मंगलवार और शनिवार को तो यहाँ भक्तों की काफी भीड़ रहती है।
मंदिर की खास बात यह है कि यहाँ भगवान के दर्शन के साथ-साथ पहाड़ियों और प्रकृति का सुंदर नजारा भी देखने को मिलता है।
लेकिन आज जो मंदिर इतना बड़ा और सुंदर दिखाई देता है, कभी यहाँ ऐसा कुछ नहीं था। यहाँ सिर्फ पहाड़, झाड़ियाँ और एक सुनसान जगह हुआ करती थी।
कभी यहाँ बाबा निर्मल दास जी रहते थे
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, करीब 300 साल पहले बाबा निर्मल दास जी महाराज, जिन्हें बाबा नरवर दास जी भी कहा जाता है, इस जगह पर आए थे।
कहा जाता है कि पहाड़ियों का शांत वातावरण और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता उन्हें इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहीं रहकर भगवान हनुमान की साधना शुरू कर दी।
मंदिर की परंपरा के अनुसार बाबा निर्मल दास जी ने एक चट्टान पर संजीवनी पर्वत हाथ में लिए हनुमान जी की आकृति बनवाई और यहीं बैठकर पूजा करने लगे।
बाद में बाबा निर्मल दास जी के देवलोक गमन के बाद यह जगह धीरे-धीरे सुनसान हो गई और लोगों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रही।
आज मंदिर में प्रवेश से पहले बाबा निर्मल दास जी से जुड़ा एक स्थान भी है। यहाँ धार्मिक कार्यक्रम और भजन आदि होते हैं।
फिर 1961 में यहाँ पहुँचे पंडित राधेलाल चौबे
इस जगह की कहानी में सबसे बड़ा बदलाव वर्ष 1961 में आया।
मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 9 अगस्त 1961 को पंडित राधेलाल चौबे जी अपने कुछ मित्रों के साथ लक्ष्मण डूंगरी आए थे।
उस समय यहाँ न कोई बड़ा मंदिर था और न ही आने-जाने का अच्छा रास्ता। बताया जाता है कि वहाँ एक चरवाहे ने पंडित चौबे को बताया कि इस जगह पर हनुमान जी हैं।
इसके बाद पंडित राधेलाल चौबे और उनके साथियों ने वहाँ लगी झाड़ियाँ हटाईं। झाड़ियों के पीछे एक चट्टान दिखाई दी, जिस पर सिंदूर लगा हुआ था और हनुमान जी की आकृति दिखाई दे रही थी।
यही जगह आगे चलकर खोले के हनुमान जी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुई। कहा जाता है कि उस दिन के बाद पंडित राधेलाल चौबे का पूरा जीवन ही भगवान हनुमान की सेवा में लग गया।
शुरुआत सिर्फ एक छप्पर से हुई थी
आज मंदिर में बड़े-बड़े भवन और कई मंदिर दिखाई देते हैं। लेकिन शुरुआत बहुत छोटी थी। पंडित राधेलाल चौबे और उनके साथियों ने सबसे पहले यहाँ एक छप्पर और कच्चा रास्ता बनाया।
फिर धीरे-धीरे लोग यहाँ आने लगे। आने वाले लोगों के लिए पानी, भोजन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था की जाने लगी।
शुरुआत में मंदिर में एक रजिस्टर भी रखा जाता था। उसमें आने वाले भक्त अपना नाम और पता लिखते थे। जिस जगह पर पहले लोग आने से डरते थे, वहाँ धीरे-धीरे भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी।
इसी जगह से जुड़ा है ‘खोले’ नाम
अब सवाल आता है कि मंदिर का नाम खोले के हनुमान जी क्यों पड़ा? इसके पीछे भी यहाँ की प्राकृतिक बनावट है।
जब यह इलाका बिल्कुल सुनसान था, तब बरसात के दिनों में पहाड़ियों की खोह से पानी बहता था। स्थानीय भाषा में ऐसी जगह को ‘खोला’ कहा जाता है।
इसी वजह से यहाँ विराजमान हनुमान जी को खोले के हनुमान जी कहा जाने लगा। आज भी मंदिर का नाम सुनते ही जयपुर के लोगों के दिमाग में पहाड़ियों के बीच बसा यही मंदिर आता है।
पंडित राधेलाल चौबे ने बनाई नरवर आश्रम सेवा समिति
मंदिर के विकास के लिए पंडित राधेलाल चौबे ने वर्ष 1961 में नरवर आश्रम सेवा समिति की स्थापना की। इसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का विकास होता गया।
मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार, वर्ष 1976 में यहाँ पहला अन्नकूट महोत्सव हुआ। इसके बाद धार्मिक कार्यक्रम लगातार बढ़ते गए। आज यहाँ रामायण पाठ, सुंदरकांड, भजन, यज्ञ और कई दूसरे धार्मिक कार्यक्रम होते हैं।
धीरे-धीरे बढ़ता गया मंदिर
समय के साथ मंदिर का आकार भी बढ़ता गया और यहाँ आने वाले लोगों की संख्या भी। आज मंदिर परिसर काफी बड़ा है। यहाँ भगवान हनुमान जी के अलावा कई दूसरे देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।
यहाँ श्रीराम दरबार, गणेश जी, ऋषि वाल्मीकि, तुलसीदास जी, गायत्री माता, वैष्णो माता, गंगा माता, अन्नपूर्णा माता, तेजा जी और द्वादश ज्योतिर्लिंग जैसे धार्मिक स्थल भी देखने को मिलते हैं।
इसलिए अगर आप यहाँ जाएँ तो सिर्फ हनुमान जी के दर्शन करके वापस न आएँ। पूरे परिसर को घूमने में थोड़ा समय जरूर लगाएँ।
राम दरबार भी देखने लायक है
मंदिर परिसर में बना राम दरबार भी काफी सुंदर है। यहाँ भगवान राम के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की प्रतिमाएँ हैं।
मंदिर की दीवारों और शीशों पर की गई सजावट भी देखने में अच्छी लगती है। कई जगहों पर फूलों और दूसरी सजावट से मंदिर को बहुत सुंदर तरीके से सजाया जाता है।
तेजा जी मंदिर की कहानी भी अलग है
मंदिर परिसर में वीर तेजा जी का मंदिर भी है। मंदिर की जानकारी के अनुसार, 1996 में पंडित राधेलाल चौबे जी ने तेजा जी का मंदिर बनवाया था।
इसके पीछे एक स्थानीय मान्यता बताई जाती है। कहा जाता है कि यहाँ एक बहुत बड़ा साँप दिखाई दिया था। कुछ समय बाद उसने अपना शरीर छोड़ दिया।
इसके बाद इस घटना को वीर तेजा जी से जोड़कर यहाँ तेजा जी का मंदिर बनाया गया। यह मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता है।
यहाँ 24 घंटे जलती है धूनी
खोले के हनुमान जी मंदिर में अखंड धूना भी है। मंदिर की जानकारी के अनुसार, यह धूना कब से जल रहा है, इसकी सही जानकारी किसी के पास नहीं है।
बताया जाता है कि जब पंडित राधेलाल चौबे पहली बार यहाँ आए थे, तब भी यहाँ धूना जल रहा था। इसके बाद चौबे जी ने इसे लगातार जलाए रखने की व्यवस्था की।
आज भी यहाँ धूना जलता रहता है। इस जगह पर गाय के गोबर और चिकनी मिट्टी का लेप किया गया है और ऊपर लकड़ी की छत बनी हुई है।
मंदिर के बाकी भव्य हिस्सों से अलग यह जगह काफी साधारण दिखाई देती है, लेकिन इसी वजह से यह लोगों का ध्यान खींचती है।
पंडित राधेलाल चौबे की समाधि भी यहीं है
जिस व्यक्ति ने इस सुनसान पहाड़ी को मंदिर के रूप में विकसित करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया, उनकी समाधि भी मंदिर परिसर में बनी हुई है।
पंडित राधेलाल चौबे जी का निधन 5 जनवरी 2010 को हुआ।
मंदिर की जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009 में यहाँ अंतरराज्यीय स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता भी आयोजित हुई थी। इसके आयोजन में चौबे जी ने काफी मेहनत की थी।
आयोजन के बाद उनकी तबीयत खराब हुई और अगले वर्ष उनका निधन हो गया। आज मंदिर परिसर में उनकी संगमरमर की समाधि है। उनकी स्मृति से जुड़ी दूसरी चीजें भी यहाँ देखने को मिलती हैं।
यहाँ सिर्फ पूजा नहीं होती, भंडारा भी चलता है
खोले के हनुमान जी मंदिर में भोग और प्रसाद की भी अपनी परंपरा है। यहाँ हनुमान जी को चूरमा, रोट, गुड़-चने, बूंदी के लड्डू, बर्फी और दूसरे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।
भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहाँ सवामणी भी करवाते हैं। मंदिर में बड़ी रसोई है, जहाँ भोजन तैयार किया जाता है।
कई अवसरों पर बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती है। अन्नकूट के दिन तो यहाँ का माहौल और भी खास हो जाता है।
मंदिर में पूरे साल धार्मिक कार्यक्रम होते हैं
खोले के हनुमान जी मंदिर में सालभर अलग-अलग धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
हनुमान जयंती, रामनवमी, गुरु पूर्णिमा, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, तेजादशमी, नवरात्र, दीपावली और अन्नकूट जैसे अवसरों पर यहाँ विशेष कार्यक्रम होते हैं।
मंदिर के आसपास की पहाड़ियाँ भी बहुत सुंदर हैं
खोले के हनुमान जी की सबसे बड़ी खासियतों में से एक यहाँ का प्राकृतिक वातावरण है। मंदिर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। मंदिर के आसपास हरियाली और खुला वातावरण देखने को मिलता है।
जयपुर जैसे बड़े शहर में रहते हुए अगर आप कुछ समय के लिए भीड़-भाड़ से दूर जाना चाहते हैं तो यहाँ का वातावरण आपको अच्छा लगेगा।
सुबह और शाम के समय पहाड़ियों के बीच मंदिर का नजारा और भी सुंदर दिखाई देता है।
पहली बार जाएँ तो इन जगहों को जरूर देखें
अगर आप पहली बार खोले के हनुमान जी जा रहे हैं तो थोड़ा समय लेकर पूरा मंदिर परिसर देखें। सबसे पहले मुख्य हनुमान जी के दर्शन करें।
इसके बाद राम दरबार, गणेश जी, बाबा निर्मल दास जी का स्थान, तेजा जी मंदिर, द्वादश ज्योतिर्लिंग, वैष्णो माता, गंगा माता और अन्नपूर्णा माता के दर्शन कर सकते हैं।
इसके अलावा पंडित राधेलाल चौबे जी की समाधि और अखंड धूना भी जरूर देखें। और सबसे आखिर में कुछ समय मंदिर के आसपास की पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण को देखने के लिए निकालें।
आप इस जगह पर रोपेवे का आनंद भी ले सकते हैं।
एक सुनसान पहाड़ी से शुरू हुई कहानी
खोले के हनुमान जी की पूरी कहानी को देखें तो इसकी सबसे खास बात यही है कि आज का यह बड़ा मंदिर कभी एक सुनसान पहाड़ी पर छोटी-सी पूजा की जगह था।
एक तरफ बाबा निर्मल दास जी की साधना से जुड़ी मान्यता है। दूसरी तरफ पंडित राधेलाल चौबे जी की सेवा और मेहनत की कहानी है।
और फिर धीरे-धीरे लोगों की आस्था जुड़ती गई और एक छोटी-सी जगह आज इतने बड़े मंदिर परिसर में बदल गई।
आज यहाँ हजारों लोग भगवान हनुमान के दर्शन करने आते हैं। कोई मनोकामना लेकर आता है, कोई प्रसाद चढ़ाने आता है और कोई जयपुर घूमते हुए इस खूबसूरत जगह को देखने पहुँचता है।
यही खोले के हनुमान जी की सबसे खास बात है—यहाँ आपको एक ही जगह पर भगवान के दर्शन, पहाड़ियों की सुंदरता, धार्मिक वातावरण और एक बहुत पुरानी परंपरा से जुड़ी कहानी, सब कुछ देखने को मिल जाता है।
अगर आप जयपुर घूमने जा रहे हैं, तो खोले के हनुमान जी को सिर्फ एक मंदिर समझकर न देखें। थोड़ा समय लेकर जाएँ, पूरा परिसर घूमिए और पहाड़ियों के बीच इस जगह के वातावरण को महसूस कीजिए।
